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फ़ैसले की वजह

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फ़ैसले की वजह कोई सोच भी नहीं सकता था कि फ़ैसला ऐसा आएगा , लेकिन फ़ैसला तो आ ही गया था । इस फ़ैसले ने कितने ही लोगों की नींद उड़ा दी । हलाकान कर देने वाली गर्मी में इस फ़ैसले का क्या मतलब हो सकता था , जो लोग सोचते थे मोदी की वापसी किसी भी हाल में नहीं होगी उनका अंक गणित धरा का धरा रह गया। ख़ुद भाजपा ए जो लोग नाउम्मीद पाले बैठे थे, वे भी इस कथित करिश्माई जीत से हैरान थे । जिस बंगाल और उड़ीसा से सत्ता की जादुई आँकड़े की भरपाई की उम्मीद की जा रही थी, उसकी ज़रूरत ही नहीं पड़ी। हाँ, लेकिन उड़ीसा बंगाल भी फ़ैसले के साथ थे । फ़ैसले को लेकर लोकतंत्र में सवाल उठाना ही ग़लत मान लिया गया है , इसलिए इस फ़ैसले पर सवाल उठाने से पहले ही भक्तों ने मज़ाक़ उड़ाना शुरू कर दिया था। हालत यह हो गई कि हिजड़े तक पर्दा करने लग गए । एक डर और नाउम्मीदी के बीच आए इस फ़ैसले की वजह क्या हो सकती है? सबके अपने दावे है , लेकिन खुलकर कहने के एतराज़ ने लोकतंत्र के इस सबसे बड़े देश में भविष्य के ख़तरे की ओर आगाह तो कर ही दिया है। जीत एक ऐसा उन्माद है जो विरोधियों को बर्फ़ कर दे, लेकिन कभी न कभी तो इस फ़ैसले की वजह ढू...

आत्म-मुग्ध

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आत्म मुग्ध बीते पांच सालों में क्या हुआ यह जानने के पहले आपको दो हजार ग्यारह-बारह में जाना ही होगा। क्योंकि उसके पहले आप बीते पांच सालों को समझ ही नहीं पायेंगे? मेरी समझ में बीते पांच सालों में क्या हुआ इसे तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के विरूद्ध अन्ना हजारे और रामदेव बाबा के आंदोलन केखड़े होने से ही शुरू किया जाना चाहिए? शायद यह पहली बार था जब देश के लोगों ने सुना कि मनमोहन सिंह की सरकार गांधी परिवार के इशारे पर कठपुतली की तरह नाच रही है और देश का धन विदेशों में जमा करने वालों को संरक्षण दिया जा रहा है। लोकपाल तत्काल बनाना चाहिए। मनमोहन सरकार में भ्रष्टाचार बेगाबू हो गया है पाकिस्तान जैसे पिद्दी देश हमें आंख दिखा रहा है और आतंकवादियों तक को संरक्षण दिया जा रहा है। आतंकवादियों की मेहमान नवाजी हो रही है और कश्मीर में अलगाववादियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी तरह के सवाल इतने जोर शोर से अन्ना-बाबा ने न केवल उठाये बल्कि पूरे देश में रामदेव बाबा ने इसका घूम-घूम कर प्रचार किया। कैग की रिपोर्ट ने इस प्रचार को सत्यता का बल दिया और एक दिन बाबा ने इन मुद्दों को लेकर दिल्ली में धरना ...

राष्ट्रधर्म और धर्म

पाकिस्तान के बालाकोट के हमले के बाद तो राकेश ने भाजपा को इस तरह से पेश करना शुरू कर दिया मानों भाजपा के अलावा इस देश में दूसरा कोई राष्ट्रवादी ही नहीं है। वह चिखचिख कर करने लगा कि मोदी है तो मुमकिन है। इस हमले के बाद बताया जाने लगा कि पाकिस्तान थर थर कांपने लगा है। पाकिस्तान बरबाद हो गया है और अब वह भारत पर आतंकवादी हमले का दुस्साहस नहीं करेगा। सीमा पार से गोलीबारी बंद हो जायेगी। राष्ट्रवाद का उफान भाजपाईयों में सर चढ़कर बोलने लगा था लेकिन मुकेश ने कहा देखना पाकिस्तान कभी भी अपनी हरकत से बाज नहीं आने वाला है न सीमापार से गोलीबारी बंद होगी और न ही आतंकवादी गतिविधियां ही समाप्त होने वाली है। मैने मुकेश से इसकी वजह पूछी तो उन्होंने बेबाकी से कहा कि जो देश 1971 में बुरी तरह पराजित हुआ हो। जिस देश के दो टुकड़े कर एक लाख सैनिकों को आत्मसमर्पण करना पड़ा हो। यह एक ऐसा अपमानजनक स्थिति है जो उसे चैन से बैठने नहीं देगा। यही वजह है कि वह कभी पंजाब के रास्ते तो कभी कश्मीर के रास्ते भारत को परेशान करता है। मुकेश ने 80 के दशक के खालिस्तान समर्थकों को पाकिस्तान से मिलने वाली मदद का भी खुलासा करके...

कट्टरता और श्रेष्ठता -3

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धार्मिक कट्टरता मेरे लिए स्याह सुरंग में बैठे उस व्यक्ति की तरह था जो अपने वजूद बचाने ईश्वर से लगातार विनती भी करता है और जरा सी आहट या अनहोनी की निर्मूल आशंका पर हमालवर हो जाता है। मुस्लिम शासको का अत्याचार आज भी राजनीति का केन्द्र बिन्दु बन जाता था। यह बात कोई भी मानने को तैयार नहीं था या किसी ने यह समझने की कोशिश नहीं की कि राजतंत्र का मलतब ही गलत था इसलिए तो लोकतंत्र की स्थापना हुई है। हिन्दूवादी संगठनों ने स्वयं को राजनैतिक सत्ता में स्थापित करने जिस राष्ट्रवाद और हिन्दूत्व की दुहाई देते थे उसमें कहीं न कहीं ईसाईयों का धर्मान्तरण और मुस्लिमों का शरीयत कानून को जिम्मेदार बताया जाता था। यह भी सच है कि इन दिनों बहु विवाह और ज्यादा बच्चा पैदा करने से मुस्लिम भी पीछे छूट चुका था वे समय के साथ शिक्षित हो चुके थे और वे भी दो से ज्यादा बच्चे न तो पैदा करते थे और न ही चार शादियां करते न ही हममें से किसी को कोई मुस्लिम दिखा था। लेकिन भाजपा की राजनीति की शुरूआत ही कई बार इसी मसले से शुरू होती थी। मुस्लिमों की बढ़ती आबादी से हिन्दुत्व को खतरा दिखाया जाता था और इसके समर्थन में प्रवीण तोगडि...