अल्प-विराम
अल्प विराम यह सच है कि इन सत्तर सालों में सरकारों ने बहुत बेईमानी की। वोट की खातिर ऐसा कुछ किया जिससे सरकार की नियत पर सवाल उठाये जा सकते हैं लेकिन यह भी उतना ही सच है कि जिस मुस्लिम तुष्टिकरण को लेकर कांग्रेस बदनाम है वह मुसलमान भी कांग्रेस के साथ कहां है।उन्हें जब भी कांग्रेस का विकल्प मिला वह उनके साथ चले गये। देश के सबसे बड़े सूबा उत्तरप्रदेश में मुसलमान सपा-बसपा के साथ है तो बिहार मे लालू नीतिश के साथ हर प्रदेश में मुसलमान क्षेत्रीय क्षत्रपों के साथ खड़ा है लेकिन धर्म निरपेक्ष की दुहाई देता कांग्रेस का मतदाताओं पर पकड़ कमजोर होता चला गया। यह मसला मैं इसलिए उठा रहा हूं क्योंकि जिस धर्मनिरपेक्ष की दुहाई के दम पर भारत का संविधान खड़ा है वह एक तरह से गाली बना दिया गया है। वक्त के साथ बहुत कुछ बदला है और इस बदलाव की अनदेखी ने ही हमारे सामाजिक ताने-बाने पर प्रहार किया हैं। इसलिए मैं वक्त को कुछ पीछे ले जाकर सोचने की कोशिश कर रहा था कि आखिर मौजूदा हालात के लिए सिर्फ सावरकर या संघ दोषी है ? या कांग्रेस की मुस्लिम तुष्टिकरण भी दोषी है। आजादी के 70 सालों में हमने कई मामलों में विश्...